✍️निसार अहमद
वाराणसी का दालमंडी क्षेत्र आज केवल टूटी हुई दुकानों और जर्जर मकानों का मंजर नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों के बिखरे हुए सपनों की दर्दनाक तस्वीर भी है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई, मेहनत और उम्मीदें इन्हीं दुकानों और मकानों में लगा दी थीं।
आज अनेक व्यापारी ऐसे हैं जिनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। घर का चूल्हा कैसे जलेगा, बच्चों की स्कूल फीस कैसे भरी जाएगी, कॉपी-किताबें कहाँ से आएंगी, बीमार परिजनों का इलाज कैसे होगा—इन सवालों ने उन्हें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके सामने सम्मान के साथ जीवनयापन करना भी कठिन हो गया है।
ऐसे समय में केवल सहानुभूति पर्याप्त नहीं है, बल्कि संवेदनशील समाज का हाथ बढ़ाना सबसे बड़ी मानव सेवा होगी।

हम वाराणसी सहित देश के सभी सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों, धार्मिक एवं सेवा संगठनों, उद्योगपतियों, आर्थिक रूप से संपन्न नागरिकों और समाज के प्रत्येक संवेदनशील व्यक्तियों से विनम्र किंतु हृदयस्पर्शी अपील करते हैं कि वे दालमंडी के इन पीड़ित परिवारों की तत्काल सहायता के लिए आगे आएँ। कोई बच्चे की फीस का दायित्व उठाए, कोई दवाइयों की व्यवस्था करे, कोई राशन उपलब्ध कराए, तो कोई पुनः रोजगार खड़ा करने में सहयोग करे। आपकी छोटी-सी मदद किसी परिवार की उम्मीद, किसी बच्चे की पढ़ाई और किसी घर का बुझता हुआ चूल्हा फिर से जला सकती है।
याद रखिए, मुसीबत के समय बढ़ा हुआ एक हाथ केवल किसी की आर्थिक सहायता नहीं करता, बल्कि उसके टूटते हुए विश्वास और जीने की उम्मीद को भी सहारा देता है। आइए, हम सब मिलकर दालमंडी के इन पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हों, ताकि उन्हें यह एहसास हो कि समाज ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा है। यही हमारी इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान होगी।

