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रैदास का बेगमपुरा, शोषण मुक्त समाज का स्वप्न

लेखक – मिथलेश कुमार सिंह भारतीय इतिहास और साहित्य में “आदर्श समाज” की कल्पना एक ही नहीं रही है जहाँ तुलसीदास रामराज्य की संकल्पना प्रस्तुत करते हैं, वहीं उनसे बहुत पहले लोककवि कबीर अमरदेसवा और संत रैदास बेगमपुरा जैसे वैकल्पिक समाज की परिकल्पनाएँ जनमानस तक पहुँचाते रहे हैं ये कल्पनाएँ केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि गहराई…

समाजवादियों का सामाजिक न्याय

✍️ मिथलेश कुमार सिंह उत्तर भारत की समाजवादी राजनीति की पहचान लंबे समय तक सामाजिक न्याय, बराबरी और प्रतिनिधित्व के संघर्ष से जुड़ी रही है OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा और सत्ता-संरचना में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना इसका केंद्रीय लक्ष्य रहा है लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में यही सामाजिक न्याय…

नहर ओवरफ्लो-पानी के रिसाव से बीघे फसल जलमग्न

✍️ राजीव यादव आजमगढ़ 27 दिसंबर 2025। जिले के सरायमीर के क्षेत्र के दर्जनों गांवों में  नहर ओवरफ्लो और पानी के रिसाव से बीघे फसल जलमग्न हो गई। जिसकी सूचना पर किसान सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने पीड़ित किसानों से मुलाक़ात कर उनकी समस्याएं सुनी और उनके निराकरण के लिए उच्च अधिकारियों…

ओबीसी रहनुमा ओबीसी अधिकारों के हनन पर चुप क्यों?

✍️ मिथलेश कुमार सिंह  देश की राजनीति में आज “बुलडोज़र” सिर्फ़ एक प्रशासनिक औज़ार नहीं रह गया है, बल्कि वह…

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पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार को शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

✍️ मिथलेश कुमार सिंह पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार को शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री…

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आस्था संविधान से ऊपर ? कथावाचक को परेड और गार्ड ऑफ ऑनर से उपजा विवाद

✍️ मिथलेश कुमार सिंह  भारत मनुस्मृति से नहीं, संविधान से चलता है यह कोई वैदिक मठ, ब्राह्मणवादी दरबार या धार्मिक…

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हनुमान भक्ति एक सामंती- पोंगापंथी गठजोड़ का परिणाम

✍️ मुद्रा राक्षस हिंदू धर्म के अनेक संस्थानों पर जाति-विशेष का प्रभाव स्थापित है, जो धर्म की व्याख्या और धार्मिक…

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