पुरानी पेंशन बहाली के लिए अटेवा की महारैली 25 सितंबर को लखनऊ में।

अटेवा (ऑल टीचर्स एंड एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन) जिसका गठन ही हुआ है उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों,कर्मचारियों के बुढ़ापे के लाठी पुरानी पेंशन की बहाली के लिए संगठन अपने उद्भव काल से ही उत्तर प्रदेश के शिक्षकों,कर्मचारियों और अधिकारियों की पुरानी पेंशन बहली की मांग लगातार करता रहा है इस मांग के समर्थन में अटेवा विभिन्न कार्यक्रम आयोजन करता रहा है उसमें पेंशन कार्यशाला,पेंशन जागरूकता सप्ताह, जागरूकता अभियान, सांसदों के आवास पर उपवास, विधानसभा घेराव,मोटरसाइकिल रैली, मशाल जुलूस,आक्रोश मार्च, पोस्टकार्ड अभियान, राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषण, हस्ताक्षर अभियान, एनपीएस शवयात्रा, इसी तरह के बहुत सारे अनूठे कार्यक्रम आयोजित कर पुरानी पेंशन की मांग को बुलंद किया है।

अटेवा के आंदोलनों के फलस्वरूप सरकार ने एनपीएस कार्मिकों के लिए बहुत सारी सहूलियतें दी हैं जिसमें,सेवा काल में मृत्यु के बाद कार्मिकों के परिवार को फैमिली पेंशन,एनपीएस से निकासी,एनपीएस लागू होने से पूर्व विज्ञापित पदों पर नियुक्ति पाने वाले कार्मिकों को पुरानी पेंशन का लाभ,आदि। संघर्ष का फल सदैव मिलता है भले थोड़ा विलम्ब हो जायें।

अटेवा अपने उद्देश्य के प्रति अटल है उसकी मांग पुरानी पेंशन की बहाली है वह हूबहू पुरानी पेंशन की बहाली चाहता है लेकिन सरकार तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर यथा- कभी डिजिटल अटेंडेंस तो कभी वर्षों से सेवारत शिक्षकों को अचानक टैट पास करने का फैसला लेकर तथा विभाग के अतिरिक्त अन्य अनेकों कार्य का अनावश्यक बोझ देकर आंदोलन को कमजोर करना चाहती है अथवा उसमें भटकाव पैदा करना चाहती है सरकार इसी रणनीति के तहत यूपीएस ले आई तथा सरकार द्वारा प्रचार-प्रसार किया गया। कुछ पुरानी पेंशन भोगी दरबारी संगठनों द्वारा भी इसके प्रचार प्रसार खूब किया गया। इसमें केवल एक चीज बताई गई की अंतिम वेतन का 50% और डीए इसमें मिलेगा। लेकिन यह नहीं बताया गया कि- जो यूपीएस है वह एनपीएस से भी ज्यादा घातक है इसमें कार्मिकों के जीवन भर की कमाई में काटी गई पूरी धनराशि सरकार रख लेगी उसको एक रूपया भी उसमें से वापस नहीं मिलेगा इसके बदले में उसे एक वर्ष के औसत वेतन का 50% पेंशन देने का प्रावधान किया गया है जो 10% कटौती सरकार की और 10% कर्मचारी की है तथा 8.50 % का एक आरक्षित पूल बना दिया गया। इस तरह से 20% तथा 8.50 कटौती को सरकार अपने पास रख लेगी। कर्मचारियों के पूरे जीवन की गाढ़ी कमाई को सरकार रख कर सेवानिवृत्ति के बाद 50% पेंशन देगी। इसी कारण से कर्मचारियों ने इसे नकार दिया केंद्र सरकार के 30 लाख कर्मचारियों में से ऐसे 3% कर्मचारियों ने भी यूपीएस को नहीं लिया।

एक चीज बताते चलें ओपीएस का विकल्प एनपीएस है और एनपीएस का विकल्प यूपीएस है जो भी कार्मिक एक बार यूपीएस का चयन कर लेगा वह ओपीएस में कभी भी नहीं लौट पाएगा इसलिए कर्मचारियों ने इसकी सच्चाई को जाना और इसे सिरे से खारिज कर दिया। कोई भी योजना जिसके लिए लाई गई उसे 97% लोगों ने ही उसे अस्वीकार कर दिया हो ,तो सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि- हम यह योजना जिसके लिए बना रहे थे उसे पसंद ही नहीं है इसका मतलब है उसका हित उसमें नहीं है परंतु सरकार जबरदस्ती विभिन्न प्रलोभनों के माध्यम से यूपीएस को लागू कराने पर आमादा है और कुछ दरबारी संगठन भी उसका भरपूर सहयोग कर रहे हैं अटेवा एनपीएस, यूपीएस दोनों का पुरजोर विरोध करता है और इसे खत्म कर सभी के लिए पुरानी पेंशन बहाल करने के मांग करता है अटेवा निरंतर पुरानी पेंशन बहली हेतु संघर्ष करता रहा है 21 अगस्त को अटेवा ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में ओपीएस तिरंगा यात्रा निकाल करके ओपीएस बहाली की मांग की और माननीय प्रधानमंत्री, माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित विज्ञापन अपने-अपने जिले के जिला अधिकारियों को सौपा । अटेवा ने पुरानी पेंशन बहाली के लिए प्रदेश स्तर की एक रैली को आयोजित करने की घोषणा की है जो 25 सितंबर 2026 को लखनऊ के इको गार्डन मैदान में आयोजित होगी, अटेवा के सभी पदाधिकारी सक्रिय साथी इस रैली को सफल बनाने के लिए हर दिन परिश्रम कर रहे हैं हमें सारी नकारात्मकता व आपसी विभेद को भूल करके सम्मिलित होकर के एक स्वर में सभी पेंशन विहीन शिक्षक और कर्मचारी बन करके सभी विभागों से सामंजस्य स्थापित करते हुए मिलकर अटेवा का साथ देकर अपने बुढ़ापे की लाठी पुरानी पेंशन को बहाल कराने हेतु भारी संख्या में 25 सितंबर को लखनऊ चलने के लिए तैयार रहना होगा। प्रदेश के तमाम शिक्षक/कर्मचारी संगठनों ने लगातार अटेवा के 25 सितंबर रैली को अपना समर्थन दिया है अटेवा सभी संगठनों और उन सभी साथियों का अटेवा हृदय से स्वागत करते हुए आभार व्यक्त करता है और यह उम्मीद जताता है कि- पूर्व की भांति यह समर्थन नैतिक और भौतिक दोनों रूप में 25 सितंबर को लखनऊ में दिखाई देगा। जब लखनऊ में शिक्षकों,कर्मचारियों का रेला होगा और उसे रेले में एक ही मेला होगा और वह होगा ओपीएस (OPS) बहाली का मेला।

देश के सारे शिक्षक कर्मचारी ओपीएस की बहाली चाहते हैं उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और देश के एक करोड़ कर्मचारियों में से करीब एक चौथाई कर्मचारी उत्तर प्रदेश से ही आते हैं देश के जिस राज्य में देश के एक चौथाई कर्मचारी रहते हों उनकी मांग को बहुत लंबे समय तक टालना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनी हुई सरकार के लिए संभव नहीं है सरकारें कुछ समय के लिए इसका अनदेखा कर सकती हैं लेकिन बहुत लंबे समय तक इसे रोक नहीं सकती हैं राजनीति के इस दौर में जब हर मुद्दे को लेकर राजनीतिक दल बन रहें हैं और सभी राजनीतिक दलों का उद्देश्य है सत्ता की प्राप्ति। तो देश व प्रदेश का प्रबुद्ध नागरिक शिक्षक और कर्मचारी भी अपनी समस्या के समाधानार्थ राजनीति विकल्प का रास्ता अवश्य अपनायेगा। जिससे उसकी समस्या का समाधान शीघ्र हो ।

✍️ डा आशाराम

प्रदेश उपाध्यक्ष अटेवा

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