कब्जाई जमीन खाली करने को लेकर दलित पिछड़े 27 दिनों से अनवरत धरने पर

कुशीनगर। जनपद के फाजिलनगर के रहसु जनुबीपट्टी ग्राम पंचायत में पिछले 27 दिनों से सामंती ताकतों द्वारा कब्जे की जमीन को खाली कराने के लिए चल रहा धरना प्रदर्शन आज जारी रहा।

रहसु जनुबीपट्टी ग्रामसभा में मुसहर, गोंड, खरवार, चमार और धोबी समाज के भूमिहीन गरीब लोगों की जमीनों पर सामंती और जातिवादी लोगों ने कब्जा कर रखा है। ये सामंती और जातिवादी लोग इतने रसूखदार हैं कि पूरी की पूरी कानून व्यव्स्था को ताक पर रखकर पट्टे कि जमीन को कब्जा कर रखा है। कई बार बार प्रशासन से अपनी जमीन को खाली किए जाने के लिए मिन्नत करने के बावजूद जब इन गरीब मजलूमों को इनका हक नहीं मिला तो इन्होंने प्रदर्शन का गांधीवादी तरीका अख्तियार किया। इस ग्रामसभा के मासूम ग्रामीण पिछले 27 दिनों से बाबासाहेब अम्बेडकर कि फोटो लगा कर शासन और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

ग्रामीणों के प्रदर्शन को समर्थन करते हुए समाजवादी पार्टी के मजदूर सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल कुमार ने कहा कि हम सरकार से मांग करते हैं कि इन उपेक्षित जाति के भूमिहीन लोगों की जमीनों को जल्दी से जल्दी खाली करवाया जाए। उन्होंने कहा कि भारत में सामंतवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जाति व्यवस्था से गहराई से जुड़ा है। ऊँची जातियाँ सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से प्रभुत्व बनाए रखती हैं। लेकिन यहां तो सामंतवाद और सरकार का गठजोड़ भी साफ साफ दिखाई दे रहा है और ये बहुत ही खतरनाक गठबंधन है।

उन्होंने बाबा डॉ भीमराव अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि सरकार और सामंती गठबंधन भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। यह गठबंधन आर्थिक शक्ति (सामंती वर्ग) और राजनीतिक सत्ता (सरकार) के मिलन से बनता है, जो आम जनता—खासतौर पर दलितों, किसानों और मजदूरों के हितों के खिलाफ काम करता है।

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