संतोषी माता एक अनसुलझी पहेली !

✍️ मुद्रा राक्षस

अनेक मित्र और अग्रज ये शिकायत कर चुके हैं कि हिंदू धर्म और इसके विश्वासों और आस्था को मनमाना आघात एक साजिश के तहत पहुंचाया जा रहा है। लेकिन दूसरे पर दोष लगाने से पूर्व हमे ये भी तो देखना चाहिए कि हम और हमारे विश्वास आखिर है क्या और वो कैसे पैदा हुए है और वर्तमान रूप में कैसे और कब से बने हुए हैं।

यदि कोई कहे क्योंकि मैं 0 से 9 तक सारे अंक और अ से ज्ञानी तक सारे वर्ण जानता हूं और आप कुछ भी इनके बिना नही बता या लिख सकते इसलिए मैं सर्वज्ञ हूं तो ये किस प्रकार का तर्क है?

यदि आप अपने धर्म को सर्वोपरि मानते हैं और इसे दोषमुक्त मानते हैं तो आगे पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है आप भी उसी 0 से 9 और अ से ज्ञानी वाली पंक्ति में जा कर बैठ जाइए आपको निर्वाण प्राप्त हो गया है।

यदि आप अपने आप को निरा मनुष्य ही मानते हैं तो जरूर आप कुछ समझ पाएंगे। सवाल ये है कि क्या कहने मात्र से कथन सिद्ध हो जाता है या उस से ज्यादा कुछ करना होता है?

आपके तथाकथित धार्मिक विश्वास कैसे जन्में है और किस प्रकार से विकसित हो गए हैं क्या उसका कोई महत्व है या नहीं?

आप कोई प्राचीन ग्रंथ निकाल लीजिए उसमें कोई संतोषी माता वर्णित नहीं है, वस्तुत जब 1960 के दशक में भारत में शिक्षा फैल रही थी और लाखों युवा पुरुष रोजी रोटी कमाने के लिए अपने घर से दूर निकल गए तो वो अपने पीछे चिंतित पत्नियों का एक बड़ा समूह छोड़ गए थे जो निरा अनपढ़ तो नहीं था लेकिन आठवी जमात से ज्यादा पढ़ा लिखा भी नहीं था।

उस समय इन चिंतित पत्नियों को दिलासा देने के लिए जैसे बच्चों का दिल बहलाने के लिए कहानियां लिख के परी- चुड़ैल रच दी जाती है। किसी ने एक नई देवी रच दी, अब हिंदू धर्म का साहित्य तो सदैव ही किसी भी दिशा में मोड़ा जा सकता है, ये काम सरलता से हो गया। भगवान गणेश की एक बहन थी जो उनको राखी बांधने आई, जिसे देख उनके पुत्र शुभ लाभ ने भी एक बहन की इच्छा अपने पिता से कर दी और झट से संतोषी माता पैदा कर दी गई।

जैसे पार्वती देवी पूर्व जन्म में दक्ष प्रजापति पुत्री सती थी और उसने आत्महत्या कर ली थी और फिर से जन्म लेकर पार्वती देवी बन गई। वैसे ही किसी अज्ञात कथाकार ने संतोषी माता पैदा कर दी, अब ये अज्ञात कथाकार या रचनाकार कौन था? ईसाई मिशनरी की साजिश थी? ताकि हिंदुओं को मूर्ख बनाया जा सके? कांग्रेसी सरकार द्वारा नियोजित मनोवैज्ञानिक युद्ध था ताकि जनता इस तरह के तमाशे में लगी रहे और वह आराम से राज करती रहे?

सी आई ए या के जी बी द्वारा किया गया प्रयोग था यह जानने के लिए कि भारतीय किस कदर के धर्म भक्त हैं और उनको किस हद तक मूर्ख बनाया जा सकता है? या लोभी पंडा पुजारी वर्ग का यह नया कुचक्र था ताकि और मोटी दक्षिणा प्राप्त हो सके क्योंकि कुछ ही दिनों में संतोषी माता के कई मंदिर बन गए थे।

क्या आप निश्चय से कोई एक उत्पति कारण बता सकते हैं? लेकिन इस अचानक प्रसार ने सभी लोगों को चाहे वे ईसाई मिशनरी थे, सरकार थी या सी आई ए और के जी बी ये निसंदेह बता दिया कि हिंदुओं को भ्रमित करना, डराना और किसी भी रास्ते पर ले चलना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। पंडा पुजारी वर्ग तो ये तथ्य पहले से जानता था कि जब चाहो इस तरह का तमाशा कर के धन पैदा किया जा सकता है। आप कौटिल्य का अर्थशास्त्र पढ़ सकते हैं उसमें संकट की दशा में राज्य द्वारा इस प्रकार के प्रयोग कर धन जमा करने का उपाय बताया गया है भी। अब बताइए आपकी आस्था और विश्वास के ऐसे कितने आधार है जो संतोषी माता उत्पति से वास्तव में ज्यादा मजबूत है? (क्रमशः)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *