✍️ मुद्रा राक्षस
आज का दिन केवल एक तारीख नहीं है 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अंतिम रूप दिया गया था। यह वही दिन है जब भारत ने यह तय किया कि उसका शासन कानून से चलेगा व्यक्ति या भीड़ की इच्छा से नहीं। यह दिन हमें यह याद दिलाने के लिए है कि देश का भविष्य केवल नेताओं के हाथ में नहीं बल्कि हर नागरिक के आचरण और कर्तव्य में छिपा है।
संविधान केवल किताब नहीं चेतना है
लोग अक्सर संविधान को एक मोटी किताब समझते हैं जिसमें केवल वकीलों और जजों के लिए नियम लिखे होते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि संविधान एक जीवित दस्तावेज है जो हमें यह सिखाता है कि कैसे एक जिम्मेदार और सजग नागरिक बना जाए। इसमें हमारे अधिकार ही नहीं बल्कि हमारे कर्तव्य भी लिखे गए हैं।
एक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों को जानता है लेकिन उन्हें पाने के लिए दूसरों के अधिकारों को नहीं कुचलता। और एक सच्चा नागरिक वही है जो अपने कर्तव्यों को समझकर उनका पालन करता है।
सजग नागरिक से ही मजबूत लोकतंत्र बनता है
लोकतंत्र केवल मतदान करने का नाम नहीं है। लोकतंत्र हर दिन के छोटे छोटे फैसलों से बनता है। जब कोई नागरिक नियम तोड़ने से मना करता है जब वह ईमानदारी से कर देता है जब वह सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करता है और जब वह अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है तब लोकतंत्र जीवित रहता है।
एक सजग नागरिक सवाल करता है लेकिन जिम्मेदारी के साथ। वह आलोचना करता है लेकिन समाधान के साथ। वह असहमति रखता है लेकिन हिंसा के बिना।
कर्तव्य निभाना भी आंदोलन है
अक्सर लोग सोचते हैं कि आंदोलन केवल नारे लगाने और सड़क पर उतरने से होता है। लेकिन असली आंदोलन तब होता है जब एक छात्र मेहनत से पढ़ता है एक कर्मचारी ईमानदारी से काम करता है एक व्यापारी सही तोल और सही कीमत रखता है और एक आम आदमी नियम का पालन करता है।
यह सब मिलकर समाज को मजबूत बनाते हैं। यही असली देशभक्ति है। यही संविधान के प्रति सच्चा सम्मान है।
आज का संकल्प
26 नवंबर हमें केवल यह बताने नहीं आता कि हमारा संविधान कब बना। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम उसके साथ क्या कर रहे हैं।
क्या हम अफवाहों से बच रहे हैं
क्या हम अलगाव से ऊपर उठ रहे हैं
क्या हम अपने आचरण से समाज को बेहतर बना रहे हैं
अगर इन सवालों का उत्तर हां है तो हम एक जीवंत और जागरूक नागरिक हैं।
संविधान हमें अधिकार देता है लेकिन हमें दिशा भी देता है। यदि हम उस दिशा को समझकर चलें तो कोई भी ताकत हमारे लोकतंत्र को कमजोर नहीं कर सकती।
आज के दिन केवल संविधान को याद मत कीजिए बल्कि उसे अपने व्यवहार में भी उतारने का संकल्प लीजिए। यही 26 नवंबर का सच्चा संदेश है।
